Description:शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए तुलनात्मक दृष्टि से हम देखें तो अन्य कोई व्यायाम पद्धति ऐसी सर्वांगीण एवं उपयुक्त नहीं है जो योगासन, प्राणायाम, ध्यान आदि के समक्ष टिक सके, जिसे सभी व्यक्ति सहज भाव में अपना सके तथा स्त्री-पुरुष, बालक, युवा एव वृद्ध सभी के लिए सुगम सरल एवं उपादेय हो और जिससे शारीरिक विकास, मानसिक शान्ति एव आत्मिक उन्नति हो सके।यही कारण है कि भौतिक उन्नति एवं प्रकृति उपासना से अतृप्त और विक्षुब्ध जन-मानस का आकर्षण योग की ओर हो रहा है। मेरा यह अनुभव है कि अन्य व्यायाम रजोगुण को बढ़ाने वाले चित्त-विक्षपक तथा वाहय प्रवृत्तिकारक है जबकि आसमनों, प्राणायामों ध्यान के अभ्यास से विक्षिप्त चित्त भी शान्त हो जाता है। योग की क्रान्ति पूरे देश में आ चुकी है । आने वाले समय मे यह और अधिक तीव्र होगा।ये पुस्तक 'सहज राजयोग' मैं अपने योगगुरु योगाचार्य 'संजय मुनि' और परम पूज्य माता जी व पिताजी को समर्पित करता हूँ। जिनकी प्रेरणा और मार्ग दर्शन से ये संभव हो सका।लेखक - नितीश वर्मा (हिन्दी ब्लॉगर, डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ व योग क्रिया के जानकार)We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with सहज राजयोग : योग-साधना-परिचय. To get started finding सहज राजयोग : योग-साधना-परिचय, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed. Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
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