Description:मैंने अपने जीवन में कभी भी किसी स्वर्ग या नर्क की कल्पना नहीं की थी मैं हमेशा यही मानता आया था की स्वर्ग और नर्क धरती पर ही होते है कर्म के अनुसार ही फल मिलता है अतार्थ स्वर्ग या नर्क मिलता है, जैसे कोई मनुष्य अच्छे कर्म करता है तो वह आनंद को भोगता है और वही उसके लिए स्वर्ग है और यदि कोई व्यक्ति बुरे कर्म करता है तो दंड पाता है और वही उसके लिए नर्क बन जाता है। पर मुझे ऐसा लगा की यह जो धरती पर स्वर्ग और नर्क की मैं कल्पना करता था वह मात्र देह से ही सम्बंधित है। मैं कह सकता हूँ की देह को कष्ट केवल मृत्युलोक मैं ही हो सकता है क्यूंकि देह केवल एक घर है जो आत्मा को संजो कर रखता है और पृथ्वीलोक पर ही यह देह पांच तत्व मैं विलीन हो कर यहीं रह जाती है आगे का सफर तो केवल और केवल आत्मा को ही तय करना होता है। इस पुस्तक को मैंने स्वर्ग की यात्रा इसलिए नहीं दिया की मैं स्वर्ग में गया हूँ या उसको खुद जाकर देख कर आया हूँ | अपने गुरु के आशीर्वाद से मुझे इसका अवसर प्राप्त हुआ हालांकि मेरे मन मै कभी भी स्वर्ग देखने की इच्छा नहीं हुई|We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with Meri Swarg Yatra. To get started finding Meri Swarg Yatra, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed. Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
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