Description:हावर्ड फ़ास्ट की रचना स्पार्टकस का यह अनुवाद प्रेमचंद के छोटे बेटे अमृत राय ने किया है। एक अंश..,"...सिसेरो मुस्कराया और बोला — तुम राजनीतिज्ञ हो इसीलिए मुझे बतलाओ कि राजनीतिज्ञ क्या होता है?— चालबाज, ग्रैकस ने संक्षेप में उत्तर दिया।— तुम और कुछ हो न हो स्पष्टवादी ज़रूर हो।— मुझमें यही एक गुण है और यह एक बहुत मूल्यवान गुण है। राजनीतिज्ञ के अन्दर इस चीज़ को देखकर लोग अक्सर इसको ईमानदारी समझने की भूल किया करते हैं। देखो हम लोग एक गणतन्त्र में रहते हैं। इसका मतलब है कि बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास कुछ भी नहीं है और मुट्ठी भर लोग ऐसे हैं जिनके पास बहुत कुछ है। और जिनके पास बहुत कुछ है उनकी रक्षा, उनका बचाव उन्हीं को करना है जिनके पास कुछ भी नहीं। इतना ही नहीं बल्कि वे लोग जिनके पास बहुत कुछ है उनको अपनी सम्पत्ति की रक्षा करनी होती है और इसलिए वे जिनके पास कुछ भी नहीं है, उनको तुम्हारे और मेरे और हमारे अच्छे मेज़बान एण्टोनियस की सम्पत्ति के लिए जान देने को तैयार रहना चाहिए। इसके साथ-ही-साथ यह भी है कि हमारी तरह के लोगों के पास बहुत से गुलाम होते हैं। ये गुलाम हमको पसन्द नहीं करते। हमको इस भ्रम का शिकार न होना चाहिए कि गुलाम अपने मालिकों को पसन्द करते हैं। वे नहीं करते और इसलिए गुलाम हमारी रक्षा गुलामों से नहीं कर सकते। इसलिए बहुत से लोग जिनके पास गुलाम नहीं है, उनको हमारे लिए जान देने को तैयार रहना चाहिए ताकि हम अपने गुलाम रख सकें। रोम के पास ढाई लाख सैनिक हैं। इन सैनिकों को विदेशों में जाने के लिए तैयार रहना चाहिए, इसके लिए तैयार रहना चाहिए कि मार्च करते-करते उनके पैर घिस जायें, कि वे गन्दगी में और ग़लाजत में रहें, कि वे खून में लोट लगायें — ताकि हम सुरक्षित रहें और आराम से जिन्दगी बितायें और अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति को बढ़ायें। जब ये सैनिक स्पार्टकस से लड़ने के लिए गये तो इनके पास कोई चीज़ न थी जिसकी कि वे रक्षा करते जैसी कि गुलामों के पास थी। आख़िर क्या चीज़ उनके पास थी जिसकी रक्षा करने के लिये वे स्पार्टकस से लड़ने गये थे? मगर तब भी गुलामों से लड़ते हुए वे हज़ारों की संख्या में मारे गये। हम इसके आगे भी जा सकते हैं। वे किसान जो गुलामों से लड़ते हुए मारे गये, सेना में उनके होने का सबसे पहला कारण यह है कि जागीरदारों ने उनको खेतों से खदेड़ दिया है। गुलामों को लेकर जो बड़ी—बड़ी जागीरें चलती थीं जिनमें बड़े पैमाने पर खेती होती थी उन्होंने उन किसानों को एकदम भिखमंगा बना दिया है, ऐसा भिखमंगा जिसके पास जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं; और फिर मज़ा यह है कि इन्हीं जागीरों की हिफ़ाजत के लिए वे किसान जान देते हैं। इसको देख कर कहने का जी होता है कि वाह, यह तो हद हो गई! क्योंकि मेरे प्यारे दोस्त सिसेरो, जरा सोचो कि अगर गुलाम विजयी होते तो इससे हमारे बहादुर रोमन सैनिक का क्या नुक़सान होता? सच बात तो यह है कि उन गुलामों को हमारे इन रोमन सैनिकों की बड़ी सख्त जरूरत होती क्योंकि ज़मीन की जुताई के लिए गुलाम खुद काफ़ी न होंगे। ज़मीन इतनी काफ़ी होगी कि सबको पूरी पड़ जाए और तब हमारे इस रोमन सैनिक के पास वह चीज़ होगी जिसका सपना वह सबसे ज़्यादा देखा करता है, जमीन का उसका अपना टुकड़ा और उसका निज का छोटा सा मकान। मगर तब भी वह अपने ही सपने को नष्ट करने के लिए लड़ने को चला जाता है। किसलिए? इसीलिए कि सोलह गुलाम मेरे जैसे एक मोटे थुलथुल बुड्ढे खूसट को गद्देदार पालकी में बिठाकर ढोते फिरें! क्या तुम कह सकते हो कि मैं जो कुछ कह रहा हूँ झूठ कह रहा हूँ?— मेरा ख़याल है कि जो कुछ तुम कह रहे हो अगर वह किसी साधारण आदमी ने बीच चौक में खड़े होकर कहा होता तो हमने उसे सलीब पर चढ़ा दिया होता।— सिसेरो सिसेरो, ग्रैकस हँसा, मैं क्या इसे अपने लिए धमकी समझूँ? मैं बहुत मोटा और भारी और बुड्ढा हूँ, मुझे सलीब पर चढाना मुमकिन न होगा। और फिर यह तो बताओ कि सच को सुनकर तुम इतना घबरा क्यों जाते हो? दूसरों से झूठ बोलना ज़रूरी है मगर क्या यह ज़रूरी है कि हम खुद अपने हीझूठ पर विश्वास करें?— यह तुम्हारा ख़याल है। मगर तुम इस बुनियादी सवाल को छोड़ जाते हो — क्या कोई आदमी किसी दूसरे आदमी जैसा ही होता है या उससे भिन्न होता है? तुम्हारे इस छोटे से भाषण में यही असंगति है। तुम पहले से यह मानकर चलते हो कि सब आदमी बिलकुल एक से होते हैं। मैं इस बात को नहीं मानता। मैं मानता हूँ कि श्रेष्ठ लोगों का अपना एक वर्ग होता है, ऐसे लोग जो दूसरों से ऊँचे होते हैं। बहस की चीज़ यह नहीं है कि उनको ईश्वर ने ऐसा बनाया या परिस्थितियों ने। मगर इतना है कि उन लोगों में शासन करने की योग्यता होती है। और चूँकि उनमें शासन करने की योग्यता होती है इसीलिए वे शासन करते हैं। और बाक़ी लोग भेड़—बकरियों के समान होते हैं इसलिए उनका आचरण भी भेड़—बकरियों के समान होता है। देखो न तुम एक सूत्र पेश करते हो; असल मुश्किल तो उसकी व्याख्या करने में होती है। तुम समाज की एक तस्वीर पेश करते हो, लेकिन अगर सच्चाई भी तुम्हारी तस्वीर ही की तरह असंगत होती, तो समूचा ढाँचा एक ही दिन में भरभरा पड़ा होता। तुम क्यों यह नहीं बतला पाते कि वह कौन सी चीज़ है जो इस असंगत पहेली को समेटकर रक्खे हुए है और गिरने नहीं देती।ग्रैकस ने सिर हिलाया और कहा — उसको समेट कर रखनेवाला, उसको न गिरने देनेवाला मैं हूँ।— तुम? अकेले तुम?— सिसेरो, क्या तुम सचमुच मुझे गधा समझते हो? मैंने बहुत लम्बी और ख़तरों से भरी हुई ज़िन्दगी गुज़ारी है और मैं अब भी चोटी पर हूँ। तुमने थोड़ी देर पहले मुझसे पूँछा था कि राजनीतिज्ञ क्या होता है? राजनीतिज्ञ ही इस उल्टे सीधे मकान को खड़ा रखने वाला सीमेण्ट है। उच्च वंशों वाले स्वयं इस काम को नहीं कर सकते। पहली बात तो यह कि उनके सोचने का ढंग तुम्हारे जैसा है और रोम के नागरिकों को यह पसंद नहीं है कि कोई उनको भेड़-बकरी कहे। भेड़-बकरी वे नहीं हैं — जैसा कि एक न एक दिन तुम्हारी समझ में आयेगा। दूसरी बात यह है कि इस उच्...We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with आदिविद्रोही. To get started finding आदिविद्रोही, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed. Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
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मगर तब भी गुलामों से लड़ते हुए वे हज़ारों की संख्या में मारे गये। हम इसके आगे भी जा सकते हैं। वे किसान जो गुलामों से लड़ते हुए मारे गये, सेना में उनके होने का सबसे पहला कारण यह है कि जागीरदारों ने उनको खेतों से खदेड़ दिया है। गुलामों को लेकर जो बड़ी—बड़ी जागीरें चलती थीं जिनमें बड़े पैमाने पर खेती होती थी उन्होंने उन किसानों को एकदम भिखमंगा बना दिया है, ऐसा भिखमंगा जिसके पास जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं; और फिर मज़ा यह है कि इन्हीं जागीरों की हिफ़ाजत के लिए वे किसान जान देते हैं। इसको देख कर कहने का जी होता है कि वाह, यह तो हद हो गई! क्योंकि मेरे प्यारे दोस्त सिसेरो, जरा सोचो कि अगर गुलाम विजयी होते तो इससे हमारे बहादुर रोमन सैनिक का क्या नुक़सान होता? सच बात तो यह है कि उन गुलामों को हमारे इन रोमन सैनिकों की बड़ी सख्त जरूरत होती क्योंकि ज़मीन की जुताई के लिए गुलाम खुद काफ़ी न होंगे। ज़मीन इतनी काफ़ी होगी कि सबको पूरी पड़ जाए और तब हमारे इस रोमन सैनिक के पास वह चीज़ होगी जिसका सपना वह सबसे ज़्यादा देखा करता है, जमीन का उसका अपना टुकड़ा और उसका निज का छोटा सा मकान। मगर तब भी वह अपने ही सपने को नष्ट करने के लिए लड़ने को चला जाता है। किसलिए? 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अकेले तुम?— सिसेरो, क्या तुम सचमुच मुझे गधा समझते हो? मैंने बहुत लम्बी और ख़तरों से भरी हुई ज़िन्दगी गुज़ारी है और मैं अब भी चोटी पर हूँ। तुमने थोड़ी देर पहले मुझसे पूँछा था कि राजनीतिज्ञ क्या होता है? राजनीतिज्ञ ही इस उल्टे सीधे मकान को खड़ा रखने वाला सीमेण्ट है। उच्च वंशों वाले स्वयं इस काम को नहीं कर सकते। पहली बात तो यह कि उनके सोचने का ढंग तुम्हारे जैसा है और रोम के नागरिकों को यह पसंद नहीं है कि कोई उनको भेड़-बकरी कहे। भेड़-बकरी वे नहीं हैं — जैसा कि एक न एक दिन तुम्हारी समझ में आयेगा। दूसरी बात यह है कि इस उच्...We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. 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